हमीरपुर: आरक्षण पर भाजपा उपाध्यक्ष डॉ उमाकांत लोधी का बड़ा बयान—‘योग्यता का नहीं होना चाहिए अपमान ✍🏼

डॉ उमाकांत लोधी ने कभी नहीं लिया आरक्षण का लाभ

न्यूज स्टेटस 24, विवेक द्विवेदी’हमीरपुर। आरक्षण व्यवस्था को लेकर हमीरपुर जिले के भाजपा जिला उपाध्यक्ष डॉ उमाकांत राजपूत के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। खास बात यह है कि बयान देने वाले भाजपा नेता स्वयं पिछड़ा वर्ग से आते हैं। उन्होंने आरक्षण के साथ-साथ मेधा, समान अवसर और प्रतियोगी परीक्षाओं में चयन प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। मूल रूप से राठ निवासी व डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर एवं भाजपा जिला उपाध्यक्ष डॉ राजपूत ने कहा कि “रेस का घोड़ा बनने के लिए जान लगानी पड़ती है, लेकिन आरक्षण के सहारे मिलने वाली सुविधा से वास्तविक प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। जब मुकाबला विद्वता का हो तो मुकाबला विद्वता से ही होना चाहिए।” उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका एमबीबीएस में चयन महज एक अंक से रुक गया था और उन्होंने कभी आरक्षण के आधार पर फार्म नहीं भरा। उन्होंने यह भी दावा किया कि पीसीएस मुख्य परीक्षा उन्होंने बिना आरक्षण के दी।आरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जिन वर्गों और लोगों को वास्तव में आवश्यकता है, संविधान में उनके लिए व्यवस्था है, लेकिन इस पर भी विचार होना चाहिए कि आरक्षण की जरूरत कहां, कितने समय तक और किन क्षेत्रों में है। उनका कहना था कि कमजोर और जरूरतमंद लोगों के लिए अवसर सुनिश्चित किए जाने चाहिए, लेकिन ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए जिसमें सक्षम परिवारों को भी लगातार वही सुविधाएं मिलती रहें।उन्होंने कहा, “सुविधा दो, अवसर दो, लेकिन मेधा का अपमान नहीं होना चाहिए। किसी को 90 अंक मिलने के बावजूद चयन न हो और किसी का 10 अंक पर चयन हो जाए तो यह प्रतिभा और मेहनत करने वाले युवाओं के भीतर निराशा पैदा करता है।”भाजपा नेता ने आरक्षण को लेकर अपनी आपत्ति को जातिगत विरोध के रूप में पेश करने से इनकार करते हुए कहा कि उनका सवाल व्यवस्था और अवसर की समानता से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि सामाजिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक व्यवस्था जरूरी है, लेकिन उसका लाभ वास्तव में जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे, इस पर भी गंभीरता से विचार होना चाहिए।बयान के राजनीतिक हिस्से में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए कहा कि देश “सुरक्षित हाथों में है।” उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक टिकट या पद की राजनीति नहीं है, बल्कि पूरा जीवन संगठन और विचारधारा के लिए समर्पित है।उन्होंने संगठन और सामाजिक एकता का संदेश देते हुए “बंटोगे तो कटोगे” का उल्लेख भी किया और कहा कि समाज को विभाजन से बचाकर एकजुट रहने की जरूरत है।भाजपा नेता के इस बयान ने आरक्षण बनाम मेधा की बहस को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। खासतौर पर इसलिए कि बयान देने वाला व्यक्ति स्वयं पिछड़ा वर्ग से होने का उल्लेख करते हुए आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव और जरूरतमंदों तक लाभ सीमित करने की बात कर रहा है।अब बड़ा सवाल यही है कि क्या आरक्षण व्यवस्था में आर्थिक-सामाजिक स्थिति और वास्तविक जरूरत के आधार पर नए सिरे से समीक्षा की जरूरत है, या मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था को ही जारी रखा जाना चाहिए? इस बयान के बाद यह बहस हमीरपुर से निकलकर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का विषय बन सकती है।News Status 24 | पूरी करे सच की जिज्ञासा

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