
न्यूज स्टेटस 24, मिर्जापुर से नीरज तिवारी की खास रिपोर्ट । उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 13 वर्षों की प्रशासनिक सेवा के बाद अपनी इच्छा से भारतीय प्रशासनिक सेवा से त्यागपत्र देने की घोषणा की है। वर्तमान में राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात रहीं दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश साझा कर अपने प्रशासनिक सफर को याद किया। IIT दिल्ली, IIM बैंगलोर और लंदन की नौकरी से IAS तक का सफर साधारण परिवेश से निकलकर दिव्या मित्तल ने IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने लंदन में नौकरी की, लेकिन विदेश में सफल करियर के बावजूद उन्हें अपने देश से दूर होने का खालीपन महसूस हुआ। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की ताकत इसी मिट्टी का कर्ज थी, जिसे चुकाने के लिए वह भारत लौटीं और IAS अधिकारी बनी मिर्जापुर और देवरिया में कार्यकाल रहा खास दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर, देवरिया और संत कबीरनगर में जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। मिर्जापुर में उनके कार्यकाल की सबसे चर्चित उपलब्धियों में लहुरिया दह गांव में पानी पहुंचाना शामिल रहा, जहां लंबे समय से पानी का संकट था। कठिन पहाड़ी क्षेत्र में प्रशासनिक प्रयासों के बाद गांव में नल से पानी पहुंचा। अपने विदाई संदेश में उन्होंने लिखा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है, जबकि मिर्जापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बल्कि सिर्फ एक राय है।“अपने लिए देखे सपने पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए जीना था”दिव्या मित्तल ने कहा कि प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्हें आम लोगों के जीवन में बदलाव लाने का अवसर मिला। किसी परिवार को जमीन का अधिकार मिलना, किसी दिव्यांग को सम्मान के साथ जीने का अवसर मिलना या किसी किसान के खेत तक पानी पहुंचना—इन्हीं पलों को उन्होंने अपने जीवन का वास्तविक सुकून बताया।उन्होंने यह भी लिखा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है। बुजुर्ग महिला का आशीर्वाद नहीं भूलेंगी अपने संदेश में दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के लहुरिया दह की एक बुजुर्ग महिला का भावुक प्रसंग भी साझा किया। गांव में पहली बार पानी पहुंचने पर बुजुर्ग महिला ने उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया था। दिव्या मित्तल के अनुसार, पद भले ही छूट गया हो, लेकिन उस बुजुर्ग मां का स्पर्श और आशीर्वाद जीवनभर उनके साथ रहेगा। “मूर्ख थी जो सोचा था कुछ देने आई हूं…”अपने इस्तीफे के संदेश में दिव्या मित्तल ने लिखा कि उन्हें लगा था कि वह लोगों को कुछ देने आई हैं, लेकिन सेवा के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि उन्होंने लोगों से कहीं ज्यादा पाया—प्यार, सम्मान, विश्वास और अपनापन।उनका यह भावुक संदेश अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। 13 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद उनका यह फैसला एक ऐसे अधिकारी के सफर का विराम है, जिसने सरकारी पद को केवल अधिकार नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी बदलने की जिम्मेदारी के रूप में देखने की बात कही।न्यूज स्टेटस 24
