
न्यूज स्टेटस 24, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से संचालित हो रहे पुराने ईंट भट्ठों के लिए राहत की खबर है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने 27 जून 2012 से पूर्व स्थापित ईंट भट्ठों को संशोधित उत्तर प्रदेश ईंट भट्ठा (स्थापना हेतु स्थल मापदण्ड) (प्रथम संशोधन) नियमावली, 2026 के तहत विनियमित कराने की प्रक्रिया को लेकर सूचना जारी की है।बोर्ड की ओर से प्रकाशित विज्ञापन के अनुसार, ऐसे ईंट भट्ठा संचालक जो आगामी फुकाई सत्र शुरू होने से पहले अपने भट्ठे का संचालन नियमानुसार करना चाहते हैं, वे 30 सितंबर 2026 तक निवेश मित्र पोर्टल 3.0 के माध्यम से Consent to Operate (CTO) के लिए आवेदन कर सकते हैं।27 जून 2012 से पहले स्थापित भट्ठों के मालिकों को स्पष्ट किया गया है कि 27 जून 2012 से पूर्व स्थापित ईंट भट्ठों को संशोधित नियमावली के तहत विनियमित किए जाने की सुविधा दी गई है। इसके लिए संबंधित भट्ठा संचालकों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवश्यक दस्तावेज और स्वीकृतियां प्रस्तुत करनी होंगी।फरवरी 2026 में लागू संशोधित नियमावली के तहत 2012 से पहले स्थापित उन भट्ठों को भी नियमानुसार मान्यता देने का प्रावधान किया गया है, जो उस समय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति प्राप्त नहीं कर पाए थे, बशर्ते वे निर्धारित शर्तों और प्रमाणों को पूरा करते हों।30 सितंबर तक करना होगा आवेदन बोर्ड के विज्ञापन में भट्ठा संचालकों से कहा गया है कि आगामी फुकाई सत्र प्रारंभ होने से पूर्व 30 सितंबर 2026 तक निवेश मित्र पोर्टल 3.0 के माध्यम से CTO हेतु आवेदन अवश्य करें।इस कदम का उद्देश्य पुराने ईंट भट्ठों को पर्यावरणीय एवं प्रदूषण नियंत्रण संबंधी निर्धारित मानकों के दायरे में लाना और उनके संचालन को नियमानुसार व्यवस्थित करना है।नियमों में किए गए महत्वपूर्ण बदलाव उत्तर प्रदेश सरकार की संशोधित नियमावली-2026 के तहत ईंट भट्ठों की स्थापना से संबंधित स्थल मानकों में भी बदलाव किए गए हैं। आबादी से न्यूनतम दूरी को पहले के एक किलोमीटर से घटाकर 800 मीटर किया गया है, जबकि दो ईंट भट्ठों के बीच न्यूनतम दूरी एक किलोमीटर निर्धारित की गई है।सरकार के अनुसार, संशोधित व्यवस्था से वर्ष 2012 से पहले स्थापित लगभग 4,000 ईंट भट्ठों को नियमानुसार संचालित करने का रास्ता खुल सकता है। इससे ईंट उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार और निर्माण क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।संचालकों के लिए महत्वपूर्ण सूचना ईंट भट्ठा संचालकों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें और नियमावली के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, स्वीकृतियां तथा प्रदूषण नियंत्रण संबंधी शर्तों को पूरा करें। विज्ञापन में नियमावली से संबंधित अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय अथवा बोर्ड की वेबसाइट से संपर्क करने की बात भी कही गई है।निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश में 27 जून 2012 से पूर्व स्थापित ईंट भट्ठों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। अब संचालकों के पास अपने पुराने भट्ठों को संशोधित नियमावली के तहत विनियमित कराने और आगामी फुकाई सत्र से पहले आवश्यक CTO प्रक्रिया पूरी करने के लिए 30 सितंबर 2026 तक का समय है। News Status 24 पूरी करे सच की जिज्ञासा ✍🏼
