
News Status 24 के प्रबंध संपादक अरविंद कुमार तिवारी की स्पेशल रिपोर्ट
⚖️ दिल्ली/गोवा। देश में अधिवक्ताओं के पेशेवर प्रशिक्षण और निरंतर कानूनी शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। Bar Council of India (BCI) ने गोवा में National Legal Academy (NLA) स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। प्रस्तावित अकादमी को National Judicial Academy, भोपाल की तर्ज पर विकसित करने की तैयारी है। BCI के चेयरपर्सन मनन कुमार मिश्रा के अनुसार, National Legal Academy की स्थापना गोवा स्थित India International University of Legal Education and Research (IIULER) के कैंपस में किए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य देशभर के अधिवक्ताओं को आधुनिक दौर की जरूरतों के अनुरूप निरंतर प्रशिक्षण और पेशेवर शिक्षा उपलब्ध कराना है।युवा वकीलों के लिए पोस्ट-एनरोलमेंट ट्रेनिंग प्रस्तावित व्यवस्था में विशेष रूप से नए और युवा अधिवक्ताओं के लिए Post-Enrolment Training पर जोर दिया जाएगा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम लगभग 10 दिन से दो सप्ताह की अवधि का हो सकता है। हालांकि, इसकी अंतिम अवधि, पाठ्यक्रम और अनिवार्यता से जुड़े विस्तृत नियम BCI की ओर से स्पष्ट किए जाने बाकी हैं।इस प्रशिक्षण में न्यायिक प्रक्रिया, पेशेवर आचरण, नैतिक मानदंड, व्यावहारिक वकालत, कानूनी तकनीक और बदलते तकनीकी परिवेश जैसे विषयों को शामिल किए जाने की दिशा में विचार किया जा रहा है।सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद तेज हुई पहल National Legal Academy की पहल का सीधा संबंध सुप्रीम कोर्ट के Ajay Vijh v. Indian Banks Association मामले में 7 जुलाई 2026 को दिए गए फैसले से है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ताओं के लिए Continuing Legal Education (CLE) को संस्थागत रूप देने और National Legal Academy की स्थापना के प्रस्ताव पर BCI को आगे बढ़ने को कहा था। फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं की पेशेवर क्षमता, नैतिक मानकों और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए निरंतर कानूनी शिक्षा आवश्यक है। अदालत ने मामले को 31 अगस्त 2026 को आगे विचार के लिए सूचीबद्ध किया है और BCI से CLE तथा National Legal Academy से संबंधित प्रगति पर हलफनामा दाखिल करने को कहा है। बदलते दौर में वकीलों को नई तकनीक से जोड़ने पर जोर कानून के क्षेत्र में लगातार हो रहे बदलाव, डिजिटल न्याय व्यवस्था, नई तकनीकों और कानूनी शोध के आधुनिक तरीकों को देखते हुए प्रस्तावित अकादमी को केवल शुरुआती प्रशिक्षण तक सीमित रखने के बजाय structured lifelong post-enrolment education के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम माना जा रहा है।इस पहल से देशभर के अधिवक्ताओं को एक समान और व्यवस्थित तरीके से पेशेवर कौशल विकसित करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही, इसका लक्ष्य कानूनी पेशे में professional standards, ethical standards और technological competence को मजबूत करना भी है।हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि अभी National Legal Academy की विस्तृत कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण की अनिवार्यता, बैच व्यवस्था, पाठ्यक्रम और लागू होने की तारीख को लेकर अंतिम नियम सामने आना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट में 31 अगस्त की अगली सुनवाई और BCI की प्रस्तावित रिपोर्ट के बाद इस दिशा में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है। कानूनी पेशे के लिए यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे वकालत में प्रवेश के बाद भी अधिवक्ताओं के ज्ञान और कौशल को लगातार अपडेट रखने के लिए एक संस्थागत व्यवस्था विकसित हो सकती है। News Status 24 पूरी करे सच की जिज्ञासा ✍🏼
