
न्यूज स्टेटस 24।ब्यूरो कासगंज/सहावर। कासगंज जिले के सहावर क्षेत्र के गांव फरौली में भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित किए जाने और बाद में प्रशासन द्वारा उसे हटाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में विभिन्न ब्राह्मण संगठनों ने प्रशासन के समक्ष अपना विरोध दर्ज कराया है और भगवान परशुराम की प्रतिमा को विधि-विधान एवं नियमानुसार दोबारा स्थापित किए जाने की मांग उठाई है।मामले की शुरुआत गांव फरौली में भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित किए जाने से हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रतिमा स्थापना को लेकर प्रशासनिक अनुमति का मुद्दा सामने आया। शिकायत मिलने के बाद देर रात प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने वहां मौजूद लोगों से बातचीत की और प्रतिमा को वहां से हटाकर सुरक्षित स्थान पर रखवा दिया।प्रतिमा हटाए जाने की कार्रवाई के बाद ब्राह्मण समाज और विभिन्न संगठनों में नाराजगी देखी गई।ब्राह्मण स्वयंसेवक संघ एवं अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा सहित अन्य सामाजिक संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा मामला बताते हुए प्रशासन से प्रतिमा को सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित कराने की मांग की है।राज्य महिला आयोग की सदस्य को सौंपा ज्ञापन प्रतिमा हटाए जाने के विरोध में अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के पदाधिकारियों ने राज्य महिला आयोग की सदस्य रेनू गौड़ को ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की। संगठन की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि सहावर क्षेत्र के फरौली गांव में भगवान बाबा परशुराम की प्रतिमा हटाए जाने से समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।ज्ञापन में प्रतिमा को सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित कराने के साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी गई। संगठन ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि धार्मिक भावनाओं से जुड़े मामलों में स्थानीय लोगों और संबंधित संगठनों से संवाद कर समाधान निकाला जाए।जिलाध्यक्ष पंकज मिश्रा के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में चेतावनी भी दी गई कि यदि मामले का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बाध्य होगा।प्रतिमा स्थापना को लेकर क्या है विवाद?पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल प्रतिमा स्थापना के लिए आवश्यक प्रशासनिक अनुमति को लेकर है। प्रशासन की ओर से सामने आई कार्रवाई का आधार यही बताया जा रहा है कि सार्वजनिक स्थल पर प्रतिमा स्थापना से पहले निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति का पालन किया जाना आवश्यक है।दूसरी ओर, ब्राह्मण स्वयंसेवक संघ के जिलाध्यक्ष मोहित पाठक और अखिलभारतीय ब्राह्मण सभा के जिलाध्यक्ष पंकज मिश्रा का कहना है कि भगवान परशुराम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के प्रतीक हैं और उनकी प्रतिमा हटाने से समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। संगठन अब प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं कि प्रतिमा स्थापना के लिए किन औपचारिकताओं को पूरा करना होगा और उन्हें पूरा कराने के बाद प्रतिमा की पुनः स्थापना कब तक कराई जाएगी।मामला अब जिलाधिकारी तक पहुंचा प्रतिमा प्रकरण को लेकर सामाजिक एवं राजनीतिक प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिलाधिकारी से मुलाकात किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए विवरण के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने भगवान परशुराम की प्रतिमा को सुरक्षित रखने, मामले में प्रशासनिक स्तर पर समाधान निकालने और पुनः स्थापना का रास्ता साफ करने की मांग रखी।प्रतिनिधिमंडल में क्षेत्रीय विधायक हरिओम वर्मा, कासगंज सदर विधायक देवेंद्र सिंह राजपूत सहित भाजपा एवं ब्राह्मण समाज से जुड़े कई लोगों की मौजूदगी का दावा किया गया है। हालांकि इस मुलाकात और उसमें रखी गई मांगों की आधिकारिक पुष्टि प्रशासन की ओर से स्वतंत्र रूप से सामने आना अभी बाकी है।सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।ब्राह्मण स्वयंसेवक संघ एटा के जिलाध्यक्ष मोहित पाठक ने पोस्ट में आरोप लगाया है कि पूर्व सांसद राजवीर सिंह राजू भैया और

अमांपुर विधायक हरिओम वर्मा से जुड़े कार्यक्रम के दौरान भगवान परशुराम की स्थापना के लिए पटिया लगाए जाने के बाद प्रतिमा स्थापित की गई थी और बाद में प्रशासनिक कार्रवाई में प्रतिमा हटा दी गई।इन दावों के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि प्रतिमा स्थापना की प्रक्रिया पहले से चल रही थी तो प्रशासनिक अनुमति की स्थिति क्या थी और संबंधित विभागों से अनुमति लेने की जिम्मेदारी किसकी थी।अब आगे क्या?फिलहाल पूरे विवाद का केंद्र दो प्रमुख बिंदु हैं—प्रतिमा स्थापना की वैधानिक प्रक्रिया और धार्मिक भावनाओं का सम्मान।ब्राह्मण संगठनों ने स्पष्ट रूप से प्रतिमा की पुनः स्थापना की मांग की है, जबकि प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि कानून-व्यवस्था और निर्धारित नियमों का पालन कराते हुए धार्मिक भावनाओं को भी ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जाए।यदि प्रशासन प्रतिमा स्थापना के लिए आवश्यक अनुमति और स्थान को लेकर स्पष्ट प्रक्रिया तय करता है, तो विवाद का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और इस बात पर हैं कि भगवान परशुराम की प्रतिमा को पुनः स्थापित करने के लिए क्या निर्णय लिया जाता है।न्यूज स्टेटस 24 के लिए यह मामला आगे भी फॉलो किया जाएगा। प्रशासन का आधिकारिक पक्ष और प्रतिमा पुनः स्थापना को लेकर होने वाली अगली कार्रवाई सामने आने पर खबर को अपडेट किया जाएगा।रिपोर्ट: न्यूज स्टेटस 24पूरी करे सच की जिज्ञासा
