काठमांडू से दूरभाष वार्ता ✍🏼 डॉ सुशील द्विवेदी के साथ News Status 24

News Status 24 ब्यूरो काठमांडू, नेपाल । तेजी से बढ़ते औद्योगीकरण, शहरीकरण और अनियंत्रित प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के बीच पर्यावरण संरक्षण आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। पर्यावरणविद् डॉ. सुशील द्विवेदी ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन यदि वह प्रकृति के संतुलन को बिगाड़कर किया जाएगा तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य गंभीर संकट में पड़ सकता है।डॉ. द्विवेदी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि पृथ्वी केवल वर्तमान पीढ़ी की संपत्ति नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर भी है। इसलिए विकास की हर योजना में पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई, जैव विविधता का ह्रास, प्लास्टिक प्रदूषण और बढ़ता कार्बन उत्सर्जन मानव सभ्यता के लिए गंभीर खतरे के रूप में सामने आ रहे हैं।उन्होंने कहा कि केवल सरकारों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों से पर्यावरण संकट का समाधान संभव नहीं है। इसके लिए प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी और जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आवश्यक है। इसी उद्देश्य से भारत द्वारा शुरू किया गया ‘मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment)’ पर्यावरण संरक्षण को जन-आंदोलन बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह अभियान लोगों को संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, ऊर्जा की बचत, जल संरक्षण, प्लास्टिक के कम प्रयोग तथा प्रकृति के प्रति संवेदनशील जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है।डॉ. द्विवेदी ने संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिसके कारण अनियमित वर्षा, भीषण गर्मी, सूखा, बाढ़, जंगलों में आग और हिमनदों के तेजी से पिघलने जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। भारत भी इससे अछूता नहीं है। कई शहरों में वायु प्रदूषण, जल संकट और बदलते मौसम का प्रभाव जनजीवन एवं अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। यदि समाज प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझे और दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव अपनाए, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।News Status 24 से बातचीत में डॉ. सुशील द्विवेदी ने कहा कि प्रकृति और विकास के बीच संतुलन स्थापित करना ही सतत विकास का मूल आधार है। इसके लिए सरकार, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों और आम नागरिकों को मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे, तभी पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य वास्तविक रूप से प्राप्त किया जा सकेगा। News Status 24 पूरी करे सच की जिज्ञासा ✍🏼
