
सहकार भारती के प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे की देश के राजनैतिक घटनाक्रम पर टिप्पणी
जब किसान आंदोलन हुआ, तब दिल्ली में व्यापक विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। सहकार भारती उत्तरप्रदेश के महामंत्री अरविंद दुबे का कहना है कि इस दौरान कई अप्रिय घटनाएँ हुईं, जिनमें लाल किले पर धार्मिक झंडा फहराने जैसी घटनाएँ भी शामिल रहीं। अंततः केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस ले लिए। लेखक का प्रश्न है कि इन कानूनों से किसानों को क्या लाभ या हानि थी, इस पर व्यापक चर्चा नहीं हो सकी और आंदोलन का लाभ मुख्यतः अराजक तत्वों को मिला।इसी प्रकार नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) लागू होने के बाद भी बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुए। लेखक का मत है कि यह कानून पड़ोसी मुस्लिम देशों से प्रताड़ित होकर आए हिंदू, सिख, जैन, ईसाई आदि समुदायों के लोगों को नागरिकता देने के उद्देश्य से बनाया गया था, जबकि इसके विरोध में विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों ने आंदोलन किया। श्री दुबे के अनुसार इस आंदोलन का लाभ भी आम जनता को नहीं बल्कि राजनीतिक और कट्टरपंथी तत्वों को मिला।लेख में आगे कहा गया है कि हाल के महीनों में NEET परीक्षा पेपर लीक का मुद्दा सामने आया, जिसे विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों ने बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया। लेखक का दावा है कि सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षा रद्द की, पुनः परीक्षा कराई और शीघ्र परिणाम घोषित किए।इसके बाद भी दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहे। लेखक के अनुसार इस आंदोलन में कई सामाजिक और राजनीतिक संगठन शामिल हुए तथा लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन ने भी इसे चर्चा में ला दिया। लेखक का आरोप है कि आंदोलन के दौरान कई राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों ने इसे सरकार के विरुद्ध माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किया।लेख में यह भी उल्लेख है कि 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ, जिसमें दोनों पक्षों के लोग घायल हुए। लेखक का आरोप है कि इस दौरान हिंसा, पथराव, मीडिया पर हमले तथा अभद्र व्यवहार जैसी घटनाएँ भी सामने आईं, जिससे आंदोलन की छवि प्रभावित हुई।लेखक का मत है कि अंततः सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने और तनाव कम करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर आंदोलन समाप्त कराने का रास्ता चुना।लेख के अंत में लेखक यह प्रश्न उठाते हैं कि इस पूरे घटनाक्रम में विपक्ष को क्या मिला, छात्रों को क्या मिला और देश को क्या मिला। उनके अनुसार सरकार पहले ही पुनः परीक्षा और परिणाम के माध्यम से छात्रों के हित में कदम उठा चुकी थी, जबकि इस आंदोलन से छात्रों की छवि को नुकसान पहुँचा। लेखक का निष्कर्ष है कि ऐसे आंदोलनों से देश-विरोधी और अराजक तत्वों का मनोबल बढ़ता है, जिसका प्रभाव भविष्य में देखने को मिल सकता है।— अरविन्द दुबे(उपरोक्त लेख लेखक के निजी विचार हैं। News Status 24 इन विचारों का समर्थन या खंडन नहीं करता।)
