
|न्यूज स्टेटस 24, विवेक द्विवेदी। काठमांडू ( नेपाल) आज के दौर में बच्चों की शिक्षा पर जितना ध्यान दिया जा रहा है, उतना ही ध्यान उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर देना भी आवश्यक है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नियमित खेलकूद, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली भी बच्चों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं।केंद्रीय विद्यालय के विज्ञान संचारक डॉ सुशील द्विवेदी का कहना है कि स्वामी विवेकानंद भी शिक्षा के साथ नियमित खेलकूद को आवश्यक मानते थे। उनका मानना था कि खेल बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व

क्षमता और टीम भावना का विकास करते हैं। इससे उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है।उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियां लगातार कम होती जा रही हैं। मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर पर अधिक समय बिताने से मोटापा, आंखों की समस्या, तनाव और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में अभिभावकों और स्कूलों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को प्रतिदिन कम से कम एक से दो घंटे आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करें। डॉ सुशील द्विवेदी के अनुसार बदलती खान-पान की आदतों के कारण बच्चों में कुपोषण के साथ-साथ “हिडन हंगर” (सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी) जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इसलिए पौष्टिक भोजन, नियमित व्यायाम और खेलकूद को बच्चों की दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा चलाया गया फिट इंडिया मूवमेंट भी इसी उद्देश्य को लेकर शुरू किया गया था, ताकि देश के बच्चे और युवा स्वस्थ एवं सक्रिय जीवनशैली अपनाएं। स्वस्थ शरीर ही बेहतर शिक्षा, बेहतर व्यक्तित्व और उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आज खेल केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गए हैं, बल्कि रोजगार और करियर का भी महत्वपूर्ण विकल्प बन चुके हैं। विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों में खिलाड़ियों को खेल कोटे के माध्यम से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। ऐसे में बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलों में भी बराबर अवसर देना समय की आवश्यकता है।संदेश:”हर बच्चे को किताब के साथ खेल का मैदान भी मिले, तभी स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत का निर्माण संभव होगा।” News Status 24 पूरी करे सच की जिज्ञासा।
