यदि वर्तमान सरकार को हटाने का प्रण लिया तो उसका विकल्प क्या होगा ✍🏼

न्यूज स्टेटस 24, दिल्ली । दिल्ली में शांतिपूर्ण आंदोलन के दौरान सामान्य वर्ग के बच्चों पर दिल्ली पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज और बर्बरता की कार्रवाई को लेकर समाज के एक वर्ग में आक्रोश है। इसी मुद्दे को लेकर RSS के पूर्व प्रचारक शिवनारायण तिवारी ने वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, सरकार के प्रति नाराजगी, संभावित राजनीतिक विकल्प और सनातन-सवर्ण समाज से जुड़े विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।शिवनारायण तिवारी का कहना है कि आज समाज में सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि यदि वर्तमान सरकार को हटाया जाए तो उसका विकल्प क्या होगा और कौन-सी राजनीतिक शक्ति देश एवं समाज के हित में बेहतर काम कर सकती है। उन्होंने कहा कि यह निश्चित रूप से विचारणीय विषय है। जब लोग किसी सरकार से ऊबने लगते हैं तो स्वाभाविक रूप से सत्ता परिवर्तन की चर्चा शुरू होती है और उस समय तत्कालीन सरकार को हटाना प्रमुख विषय बन जाता है।उन्होंने कहा कि देश में इससे पहले भी कई बार सत्ता परिवर्तन हुए हैं। कई मौकों पर लोगों को तत्कालीन सरकारों से निराशा हुई और परिवर्तन के बाद लोगों को उम्मीद जगी, लेकिन समय के साथ परिस्थितियां फिर बदलीं। उनके अनुसार, वर्तमान सरकार को भी जनता ने लगातार तीन बार अवसर दिया, लेकिन सरकार न तो अपने सभी वादों पर खरी उतर सकी और न ही जनता की सभी अपेक्षाओं पर। इसके बावजूद लोग अब तक परिस्थितियों को झेलते रहे हैं।शिवनारायण तिवारी ने कहा कि यदि किसी अन्य राजनीतिक दल या नेता को अवसर मिलता है तो संभव है कि वह बेहतर साबित हो और यदि ऐसा नहीं होता है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के पास दोबारा परिवर्तन का विकल्प मौजूद रहेगा। उन्होंने कहा कि लोगों को केवल इस चिंता में नहीं रहना चाहिए कि उनकी नाराजगी से कौन जीतेगा और कौन हारेगा। राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को यह विचार करना चाहिए कि जिस वर्ग ने उन्हें सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, यदि वही वर्ग उनसे दूरी बना ले तो उसका राजनीतिक प्रभाव क्या होगा।उन्होंने कहा कि भाजपा ने सामान्य वर्ग को ऐसा कौन-सा विशेष लाभ या सम्मान दिया है, जिसे किसी अन्य राजनीतिक दल के सत्ता में आने पर खोने का डर हो। उनके अनुसार, जो भी निर्णय या नीतियां समाज के हित में नहीं हैं, उनका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध होना चाहिए और मतदाताओं को अपनी पसंद के जनप्रतिनिधि का चयन करना चाहिए। सरकार का गठन अंततः उस दल या गठबंधन द्वारा किया जाएगा जिसके पास बहुमत होगा।भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के नेताओं पर समय-समय पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के कुछ ऐसे नेता, जिनकी पहले आर्थिक स्थिति सामान्य थी, आज बड़ी संपत्तियों के मालिक हैं। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी जांच एजेंसियों के राजनीतिक इस्तेमाल के आरोपों पर भी सवाल उठाया और कहा कि सत्ता परिवर्तन के बाद यदि यही कार्रवाई दूसरे राजनीतिक नेताओं के विरुद्ध होती है, तब भ्रष्टाचार और कथित अनियमितताओं की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।सनातन और सवर्ण समाज के मुद्दे पर शिवनारायण तिवारी ने कहा कि सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की रक्षा केवल सत्ता के भरोसे नहीं की जा सकती। उन्होंने ऐतिहासिक संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज ने लंबे समय तक अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए संघर्ष किया है और आज भी अपनी परंपराओं एवं सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना समाज की जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि सत्ता से धर्म का संरक्षण और संवर्धन अपने आप नहीं होता। इसके लिए समाज को स्वयं जागरूक और संगठित रहना होगा। उनके अनुसार, सनातन धर्म, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए समाज को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।शिवनारायण तिवारी ने अपने विचारों में राजनीतिक दलों से अधिक समाज के हितों और जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को प्राथमिकता देने की बात कही। News Status 24 पूरी करे सच की जिज्ञासा ✍🏼

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