
न्यूज़ स्टेटस 24 ब्यूरो उज्जैन । उज्जैन में बीते सप्ताह दो प्रशासनिक निर्णयों ने व्यापक बहस छेड़ दी है। पहला विवाद शिप्रा नदी की वर्षों पुरानी आरती व्यवस्था को लेकर है, जबकि दूसरा महाकाल मंदिर क्षेत्र के आसपास संचालित सरकारी विद्यालयों के स्थानांतरण से जुड़ा है। दोनों मामलों में स्थानीय पुजारियों, विद्यार्थियों और नागरिकों ने विरोध दर्ज कराया है।### शिप्रा आरती को लेकर क्या है विवाद?उज्जैन के रामघाट सहित तीन घाटों पर उज्जैन पुरोहित संघ के सदस्य कई वर्षों से प्रतिदिन मां शिप्रा की आरती करते रहे हैं। हाल ही में प्रशासन ने व्यवस्था बदलते हुए आरती का संचालन महाकाल मंदिर प्रबंध समिति के अधीन करने का निर्णय लिया।पुरोहित संघ का आरोप है कि पुलिस बल की मौजूदगी में उन्हें पारंपरिक आरती स्थल से हटाया गया। संघ का कहना है कि यह उनकी धार्मिक परंपरा और अधिकारों का हनन है तथा वे इस निर्णय को न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।### सरकारी स्कूलों के स्थानांतरण पर नाराज़गी दूसरा विवाद महाकाल मंदिर परिसर के आसपास स्थित पांच सरकारी विद्यालयों से जुड़ा है। प्रशासन की योजना के अनुसार इन विद्यालयों को शहर से लगभग 7 किलोमीटर दूर दाऊद खेड़ी क्षेत्र में स्थानांतरित किया जा रहा है, जबकि वर्तमान भूमि का उपयोग पर्यटन और अन्य विकास परियोजनाओं के लिए प्रस्तावित है।छात्राओं और अभिभावकों का कहना है कि दूर स्थानांतरण से विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा प्रभावित होगी। कई छात्राओं ने कलेक्टर से विद्यालय यथावत रखने की मांग की है।### विरोध और आगे की स्थिति दोनों मामलों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। एक ओर पुरोहित संघ धार्मिक परंपरा की रक्षा की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर छात्र-छात्राएं शिक्षा की पहुंच बनाए रखने की मांग उठा रहे हैं। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम और संभावित न्यायिक प्रक्रिया पर है।> न्यूज़ स्टेटस 24 की अपील: यह मामला धार्मिक आस्था, शिक्षा और शहरी विकास—तीनों से जुड़ा है। अंतिम निष्कर्ष संबंधित न्यायिक एवं प्रशासनिक निर्णयों पर निर्भर करेगा।
