
14 अगस्त देश की आजादी की पूर्व संध्या पर राष्ट्र कर्तव्य निर्वाहन हेतु चिंतन साथियो, भारत माता की आजादी के 79 वें महापर्व की समस्त देशवासियो को बधाई। राष्ट्र धर्म और समाजिक धर्म में पहले कौन?किसी भी राष्ट्र का गौरव उसकी जनता के मन में राष्ट्र के प्रति सम्मान में निहित है। सशक्त राष्ट्र गौरवशाली भविष्य का निर्माण करता है। हम सब 20 साल बाद आजादी का 100 वाॅ महोत्सव मनायेंगे। लेकिन आज हम जहाॅ पहुंचे है क्या सही मायनो में यह आजादी है। हर एक नागरिक का राष्ट्र के प्रति कर्तव्य है कि वह भृष्टाचार मुक्त, लोकतांत्रिक व्यवस्था युक्त और सबको समानता का अधिकार दाने वाली व्यवस्था के प्रति समर्पित हो। लेकिन क्या आज आप और हम अपनी जगह सही है। इस देश को आजाद कराने में सबसे ज्यादा संघर्ष हमारे पूर्वजो ने किया , पर हमने कभी उसके एवज में कोई मांग नहीं की। फिर भी आज के राजनैतिक परिवेश में हमें ही दोषी बनाया जा रहा है। समानता का अधिकार प्रदान करने वाला यह संविधान अब जाति विशेष के लिए अब समर्पित है। वोट बैंक की यह राजनीति क्या विकसित भारत का निर्माण कर पायेगी। शायद नहीं, कभी नहीं।हम विकसित भारत के रास्ते पर आगे बढते हुऐ जातीय विभेद, आपसी नफ़रत और असमानता वाले भारत का निर्माण न कर बैठे। 100 साल पूरे होने के बाद अंग्रेजो के गुलाम होने की तरह आज इन पूंजीपतियो के गुलाम न बन जाये। जिस तेजी से पूंजीवाद बढ रहा है यह विस्फोटक स्थिति दूर नहीं है। चिंतन का विषय है आखिर कमी कहाॅ रह गयी। राष्ट्रवाद के रास्ते पर चलते चलते आज हम जातिवाद के रास्ते पर पहुंच गये। वंदे मातरम् 🙏🏼
News Status 24 पूरी करे सच की जिज्ञासा
