
न्यूज़ स्टेटस 24 |मिर्जापुर से सह संपादक नीरज तिवारी की विशेष रिपोर्ट । 23 नवंबर 1983 को जन्मीं भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की 2013 बैच की अधिकारी दिव्या मित्तल अपनी संवेदनशील कार्यशैली और जनसेवा के प्रति समर्पण के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग में बी.टेक तथा आईआईएम बेंगलुरु से प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया। लंदन स्थित जेपी मॉर्गन की प्रतिष्ठित नौकरी छोड़कर उन्होंने भारत लौटने का निर्णय लिया और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया।वर्तमान में दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश शासन के राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह संत

कबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। हाल ही में उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच पर मिर्जापुर के दूरस्थ गांव लहुरिया दह की कहानी साझा की, जिसने हजारों लोगों को भावुक कर दिया।75 वर्षों तक पानी की एक-एक बूंद को तरसा गांवउत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर मिर्जापुर जिले की एक पहाड़ी पर बसे लहुरिया दह गांव में लगभग 1,500 लोग रहते हैं, जिनमें अधिकांश दलित परिवार हैं। आजादी के बाद से यह गांव पेयजल संकट से जूझता रहा। पानी की आपूर्ति टैंकरों से होती थी और लोगों को सीमित मात्रा में पानी मिलता था। ग्राम सभा टैंकरों के भुगतान के कारण कर्ज में डूब चुकी थी।महिलाओं को प्रतिदिन कई किलोमीटर दूर पथरीले रास्तों से पानी लाना पड़ता था। हालात इतने खराब थे कि लोग अपनी बेटियों की शादी इस गांव में करने से भी कतराते थे।पहली यात्रा में छलक पड़े जज्बा तजब दिव्या मित्तल पहली बार मिर्जापुर की जिलाधिकारी के रूप में इस गांव पहुंचीं तो वहां की स्थिति देखकर वे भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के सामने वे अपनी पानी की बोतल से एक घूंट पानी भी नहीं पी सकीं। सरकारी फाइलों में हर रिपोर्ट यही कहती थी कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण यहां पाइपलाइन से पानी पहुंचाना संभव नहीं है।बैठकों से नहीं, जमीनी काम से बदली तस्वीर दिव्या मित्तल और उनकी टीम ने ‘असंभव’ को चुनौती देने का निर्णय लिया। जल निगम के इंजीनियरों ने लिफ्ट आधारित जलापूर्ति प्रणाली का नया डिजाइन तैयार किया। पूरे प्रोजेक्ट को स्रोत, पम्पिंग, भंडारण और वितरण जैसे चार चरणों में विभाजित किया गया।एसी कमरों में बैठकों के बजाय हर सप्ताह मौके पर जाकर समीक्षा की गई। ‘हर घर जल’ योजना के तहत दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा किया गया।9 महीने की मेहनत और खत्म हुआ 75 वर्षों का इंतजार लगातार नौ महीने के प्रयासों के बाद वह ऐतिहासिक दिन आया जब गांव के 125 घरों में पहली बार नलों से स्वच्छ पानी बहा। इस पल को याद करते हुए दिव्या मित्तल ने बताया कि एक बुजुर्ग महिला ने उनका हाथ पकड़कर रोते हुए आशीर्वाद दिया। उस भावुक क्षण में वे स्वयं भी अपने आंसू नहीं रोक सकीं। उन्होंने स्वीकार किया कि अपने पूरे प्रशासनिक जीवन में उन्हें इससे अधिक संतोष किसी कार्य से नहीं मिला।नौकरशाही और समाज के लिए तीन बड़ी सीख ✍🏼दिव्या मित्तल ने इस अनुभव से तीन महत्वपूर्ण संदेश दिए—- सबसे दूर और सबसे गरीब गांवों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाना ही प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।- ‘असंभव’ अक्सर तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि जिम्मेदारी से बचने की मानसिकता का परिणाम होता है।- योजनाएं तभी सफल होती हैं जब अधिकारी किसी गांव की समस्या को अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी मानकर कार्य करें।’DM बेटी वाला प्यार’मिर्जापुर के लोग आज भी दिव्या मित्तल को केवल पूर्व जिलाधिकारी नहीं, बल्कि अपनी बेटी की तरह याद करते हैं। गांव के बुजुर्गों का सम्मान करना, उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेना और जनता की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना उनकी कार्यशैली की पहचान रहा है। लहुरिया दह में पानी पहुंचाने की यह कहानी आज भी उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक सेवा में जनसेवा, संवेदनशील नेतृत्व और दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रेरणादायक उदाहरण मानी जाती है।
