
न्यूज स्टेटस 24 विवेक द्विवेदी , मोदहा (हमीरपुर), 2 अगस्त।हमीरपुर जनपद के मौदहा कस्बे के एक सेवानिवृत्त लेखपाल को लगभग 14 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार न्याय मिल गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विभाग द्वारा की गई पेंशन कटौती को निरस्त करते हुए सेवानिवृत्त लेखपाल रामचंद्र शुक्ल के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।रामचंद्र शुक्ल 31 अक्टूबर 2011 को सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद विभाग ने उन पर लगाए गए आरोपों के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू की और 6 जून 2012 को उनकी एक-तिहाई पेंशन काटने का आदेश जारी कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने न्यायालय की शरण ली।मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामकुमार वर्मा ने तर्क दिया कि उत्तर प्रदेश सिविल सेवा विनियमावली के नियम 351-ए के अनुसार सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन में कटौती या दंडात्मक कार्रवाई से पहले राज्यपाल की स्वीकृति आवश्यक होती है। साथ ही विभागीय कार्रवाई भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पूरी नहीं की गई थी।मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिश कुमार गुप्ता ने 30 जुलाई को याचिका स्वीकार कर विभाग का आदेश निरस्त कर दिया। न्यायालय ने विभाग को निर्देश दिया कि सेवानिवृत्त लेखपाल की काटी गई एक-तिहाई पेंशन 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित आठ सप्ताह के भीतर वापस की जाए।हाईकोर्ट के इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों और पेंशन भोगियों के अधिकारों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया है कि सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी दंडात्मक कार्रवाई में विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।इस फैसले पर रामचंद्र शुक्ल के सहयोगियों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे न्याय की जीत बताया।
