भगवान नारायण को माता वृंदा के श्राप से मिली मुक्ति का है पावन स्थल 🙏🏼

नेपाल के मुस्तांग जिले से हमारे सह संपादक नीरज तिवारी की स्पेशल रिपोर्ट News Status 24 पूरी करे सच की जिज्ञासा

न्यूज़ स्टेटस 24 |नीरज तिवारी , नेपाल । मुस्तांग जिले में समुद्र तल से लगभग 3,800 मीटर (12,500 फीट) की ऊँचाई पर हिमालय की गोद में स्थित मुक्तिनाथ धाम सनातन धर्म के सबसे पवित्र तीर्थों में से एक माना जाता है। यह भगवान श्रीहरि विष्णु (नारायण) को समर्पित प्राचीन मंदिर है, जिसे मोक्ष प्रदान करने वाला धाम कहा जाता है।पुराणों एवं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही पावन स्थान है जहाँ भगवान विष्णु को माता वृंदा के श्राप से मुक्ति प्राप्त हुई थी। इसी कारण इस धाम का नाम “मुक्तिनाथ” पड़ा, अर्थात वह स्थान जहाँ मुक्ति की प्राप्ति होती है।मंदिर परिसर में स्थित 108 गौमुख जलधाराएँ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र हैं। इन जलधाराओं से हिमालय के ग्लेशियरों का शुद्ध एवं अत्यंत शीतल जल निरंतर प्रवाहित होता है। मान्यता है कि इन 108 जलधाराओं के नीचे स्नान करने तथा लक्ष्मी कुंड और
सरस्वती कुंड में डुबकी लगाने से मनुष्य के ज्ञात-अज्ञात पापों का नाश होता है, ग्रह-नक्षत्रों के दोष शांत होते हैं, आत्मा शुद्ध होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।मुक्तिनाथ धाम का संबंध पवित्र गंडकी नदी से भी है। इसी क्षेत्र से प्राप्त होने वाले शालिग्राम शिला को भगवान विष्णु का साक्षात स्वरूप माना जाता है, जिसकी पूजा भारत सहित विश्वभर के वैष्णव श्रद्धालु करते हैं।धार्मिक दृष्टि से यह धाम अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशम (दिव्य विष्णु मंदिरों) में स्थान प्राप्त है। वैष्णव परंपरा में

इसका विशेष महत्व है और जीवन में एक बार इसके दर्शन करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है।मुक्तिनाथ धाम केवल हिंदुओं की ही आस्था का केंद्र नहीं है। बौद्ध धर्मावलंबी भी इसे अत्यंत पवित्र मानते हैं। उनके अनुसार यह महान बौद्ध आचार्य गुरु पद्मसंभव (गुरु रिम्पोचे) की साधना स्थली है। इसलिए यह धाम सदियों से हिंदू और बौद्ध दोनों परंपराओं के बीच धार्मिक सद्भाव और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक बना हुआ है।हिमालय की बर्फीली चोटियों, निर्मल वातावरण और दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण मुक्तिनाथ धाम श्रद्धालुओं को केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि आत्मिक शांति, श्रद्धा, विश्वास और ईश्वर के प्रति समर्पण का अद्भुत अनुभव भी कराता है।मुक्तिनाथ धाम का संदेश यही है कि सच्ची मुक्ति केवल शरीर की नहीं, बल्कि मन, आत्मा और कर्मों की शुद्धि से प्राप्त होती है। यही इस पवित्र धाम की सबसे बड़ी महिमा है।न्यूज़ स्टेटस 24 करे सच की जिज्ञासा”
