सीनियर जर्नलिस्ट पीयूष त्रिपाठी की खास रिपोर्ट

NEWS STATUS 24 , कानपुर । भगवान शिव की आराधना का प्रमुख प्रतीक रुद्राक्ष आज केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारत और विदेशों में तेजी से बढ़ते विशाल कारोबार का हिस्सा बन चुका है। धार्मिक उपयोग के साथ-साथ योग, मेडिटेशन और आध्यात्मिक जीवनशैली के बढ़ते चलन ने इसकी मांग को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। अनुमान है कि भारत में रुद्राक्ष का सालाना कारोबार 800 से 1200 करोड़ रुपये के बीच है। हालांकि इस तेजी से बढ़ते बाजार की सबसे बड़ी चिंता नकली और मिलावटी रुद्राक्ष की बिक्री है। व्यापार से जुड़े जानकारों का दावा है कि बाजार में बिकने वाले रुद्राक्षों में करीब 70 प्रतिशत तक नकली या मिलावटी हो सकते हैं।भारत में बिकने वाले अधिकांश रुद्राक्ष नेपाल और मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया से आयात किए जाते हैं। हर वर्ष लगभग 200 से 250 टन रुद्राक्ष भारत आता है, जिसमें लगभग 80 प्रतिशत इंडोनेशिया और 20 प्रतिशत नेपाल से आयात होता है। भारत में असम, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सीमित स्तर पर इसका उत्पादन होता है।रुद्राक्ष की कीमत उसके मुख (फेस), आकार, गुणवत्ता और दुर्लभता पर निर्भर करती है। पांच मुखी रुद्राक्ष सबसे अधिक प्रचलित है, जबकि एक मुखी और 14 मुखी रुद्राक्ष की कीमत लाखों रुपये तक पहुंच सकती है। नेपाल का रुद्राक्ष दुर्लभ और महंगा माना जाता है, जबकि इंडोनेशिया का रुद्राक्ष अपेक्षाकृत सस्ता और बड़ी मात्रा में उपलब्ध होता है।सावन में कई गुना बढ़ जाती है बिक्री श्रावण मास, महाशिवरात्रि, नवरात्र और कुंभ जैसे धार्मिक अवसरों पर रुद्राक्ष की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। इस वर्ष भी कई प्रमुख शिवालयों में रुद्राक्ष से विशेष श्रृंगार की तैयारियां की जा रही हैं। श्रद्धालुओं और सेवा समितियों द्वारा लाखों रुद्राक्ष की मालाओं की बुकिंग पहले से की जा चुकी है।ये हैं देश के प्रमुख रुद्राक्ष बाजार रुद्राक्ष के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र हरिद्वार-ऋषिकेश, वाराणसी, प्रयागराज, अयोध्या, नासिक, उज्जैन, दिल्ली की खारी बावली और कोलकाता का बड़ा बाजार हैं। यहीं से देशभर के थोक और खुदरा व्यापारियों तक रुद्राक्ष पहुंचता है। ऑनलाइन बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर करोड़ों रुपये का कारोबार हो रहा है।सबसे अधिक फर्जीवाड़ा दुर्लभ रुद्राक्ष में विशेषज्ञों के अनुसार सबसे ज्यादा धोखाधड़ी एक मुखी, 14 मुखी और गौरी-शंकर रुद्राक्ष के नाम पर होती है। कई स्थानों पर प्लास्टिक, लकड़ी या कृत्रिम सामग्री को रंगकर असली रुद्राक्ष बताकर बेचा जाता है। इसलिए हमेशा विश्वसनीय विक्रेता से खरीदारी करें और लैब प्रमाणपत्र अवश्य मांगें।कैसे करें प्राथमिक पहचान- प्राकृतिक मुख ऊपर से नीचे तक लगातार दिखाई देते हैं।- प्राकृतिक छेद अंदर से खुरदरा होता है।- सतह हल्की खुरदरी होती है, अत्यधिक चमकदार नहीं।- उबालने पर रंग नहीं उतरना चाहिए।- खरीदते समय प्रमाणित लैब सर्टिफिकेट लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।ध्यान दें: पानी में डूबने या तांबे का सिक्का घूमने जैसे परीक्षणों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित पहचान नहीं माना जाता। इन पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए।स्वास्थ्य लाभ के दावों पर क्या कहता है विज्ञान?रुद्राक्ष को लेकर रक्तचाप नियंत्रित करने, तनाव कम करने और मानसिक शांति देने जैसे कई दावे किए जाते हैं। कुछ छोटे अध्ययनों में संभावित लाभों का उल्लेख जरूर मिलता है, लेकिन अभी तक इनके समर्थन में पर्याप्त और निर्णायक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि रुद्राक्ष आस्था और ध्यान का माध्यम हो सकता है, लेकिन इसे किसी भी बीमारी की दवा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।रुद्राक्ष का बाजार आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की संभावना है। धार्मिक पर्यटन, ऑनलाइन व्यापार और युवाओं में आध्यात्मिक जीवनशैली की बढ़ती रुचि इसकी मांग को लगातार बढ़ा रही है। लेकिन खरीदारों को सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि बाजार में नकली रुद्राक्ष की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। प्रमाणित विक्रेता से खरीदारी और तथ्यात्मक जानकारी ही सुरक्षित विकल्प है।— NEWS STATUS 24″पूरी करे सच की जिज्ञासा”
