

अपना मूल्यांकन जितना अच्छा हम स्वयं कर सकते हैं दूसरा नहीं क्योंकि इस संसार में एक, दुसरे,को देखने सुनने कहने का स्तर अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार ही किया जाता है इसलिए व्यर्थ के बाद, विवाद, दूर रहते हुए अपनी नेक नियत को प्रमाणिकता के आधार पर समाज में कायम रखें हो सकता है कि आज हमारी,आपकी स्थिति, परिस्थिति में उत्थान,या पराभव नजर आ रहा हो तो इसको देखकर अपनी मना स्थति पर प्रसन्नता,या खिन्नता का भाव कभी मत लाये हमेशा,हर क्षण हरपल अपने आपको उस पराशक्ति के चरणों में समर्पित करते हुए प्रार्थना करें कि हे मां तेरी इच्छा के बिना संसार में एक पत्ता भी नहीं हिलता फिर मेरी क्या बिसात कि मैं कुछ कर सकू, जो,हो रहा है जो हो चुका है, और जो होगा आपकी कृपा से अच्छा ही होगा यह सोचकर वर्तमान स्थिति से निपटने की शक्ति प्राप्त करें आपका दिन शुभ हो इसी मंगल कामना के साथ आपका शिवनारायण तिवारी – हमीरपुर, उ प्र
