
न्यूज स्टेटस 24 विवेक द्विवेदी,अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर अयोध्या में संत समाज और स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर जारी है। मामले की जांच के लिए सरकार द्वारा विशेष जांच दल (SIT) गठित किए जाने के बावजूद अब तक प्राथमिकी (FIR) दर्ज न होने को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।चर्चाओं के केंद्र में राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम है, जिनके बारे में आरोप लगाए जा रहे हैं कि एक साधारण कर्मचारी होने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में असामान्य वृद्धि हुई है। उन पर वीआईपी दर्शन पासों के कथित दुरुपयोग और संपत्तियों से जुड़े आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।इसी क्रम में लवकुश मिश्रा के आवास से कथित रूप से 10 लाख रुपये नकद मिलने तथा अनुकल्प मिश्रा द्वारा बनाए गए मकान और फार्म हाउस को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। वहीं, केडी तिवारी ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उन्होंने कोई चोरी नहीं की है और

उनकी संपत्तियां उनके बेटों की आय से अर्जित की गई हैं।जानकारी के अनुसार, केडी तिवारी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले सोने-चांदी और आभूषणों के लेखा-जोखा से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालते रहे हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि अभी तक केवल नकदी से संबंधित मामले ही सामने आए हैं, जबकि सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं।धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे ने इस मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बयानों के बाद अयोध्या में विभिन्न धार्मिक स्थलों, आश्रमों और संत समुदाय के बीच इस विषय पर व्यापक चर्चा हो रही है।फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि SIT जांच का दायरा क्या होगा और जांच एजेंसी को कितने अधिकार प्राप्त होंगे। साथ ही, FIR दर्ज न होने के कारण जांच की प्रभाव शीलता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले से जुड़े सभी आरोप अभी जांच के अधीन हैं और संबंधित पक्षों की ओर से कई आरोपों का खंडन भी किया गया है। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
