
News Status 24 | विवेक द्विवेदी,चित्रकूट। दीनदयाल औद्योगिक प्रशिक्षण केंद्र, चित्रकूट में सहकार भारती के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय विभाग संयोजक प्रशिक्षण सत्र का शनिवार को भव्य शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के विभिन्न मंडलों से आए विभाग प्रमुखों, संयोजकों और पदाधिकारियों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य सहकारिता आंदोलन को मजबूत बनाना तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की सहकारी योजनाओं की जानकारी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना है।कार्यक्रम का उद्घाटन कामदगिरि मंदिर ट्रस्ट के महंत एवं सहकार भारती के राष्ट्रीय मंत्री गजेंद्र गौतम, राष्ट्रीय संगठन प्रमुख संजय पाचपोर, प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह तथा प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता, आत्मनिर्भरता और ग्रामीण विकास का सशक्त माध्यम है। सरकार द्वारा किसानों, लघु उद्यमियों, महिला स्वयं सहायता समूहों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए संचालित योजनाओं का लाभ तभी प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंचेगा, जब सहकारिता से जुड़े कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करेंगे।आत्मनिर्भर भारत निर्माण में सहकारिता की अहम भूमिका प्रदेश अध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में सहकारिता के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। सहकार भारती का लक्ष्य सहकारिता को रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास का मजबूत आधार बनाना है। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण के साथ सामाजिक विकास को भी गति मिल सकती है।राष्ट्रीय मंत्री गजेंद्र गौतम ने अपने संबोधन में कहा कि सहकारिता भारत की प्राचीन परंपरा और सामाजिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार रही है। आज आवश्यकता है कि गांव, किसान, युवा और छोटे उद्यमियों को सहकारिता से जोड़कर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जाए।प्रशिक्षित कार्यकर्ता ही संगठन की ताकत है प्रदेश महामंत्री अरविंद दुबे ने कहा कि सहकारिता एक व्यापक सामाजिक आंदोलन है। प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को नई नीतियों, योजनाओं और संगठनात्मक कार्यप्रणाली की जानकारी दी जा रही है, जिससे वे समाज में प्रभावी भूमिका निभा सकें।राष्ट्रीय संगठन प्रमुख संजय पाचपोर ने कहा कि किसी भी संगठन की मजबूती उसके प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं पर निर्भर करती है। ऐसे प्रशिक्षण शिविर कार्यकर्ताओं को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे सहकारिता की विचारधारा और सरकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करें।ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा । वक्ताओं ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं। किसानों, युवाओं और महिला समूहों को संगठित कर आर्थिक विकास की नई संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। प्रशिक्षण सत्र में सहकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और संगठन विस्तार की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।News Status 24पूरी करे सच की जिज्ञासा
