अपना मूल्यांकन जितना अच्छा हम स्वयं कर सकते हैं दूसरा नहीं क्योंकि इस संसार में एक, दुसरे,को देखने सुनने कहने का स्तर अपनी अपनी बुद्धि के अनुसार ही किया जाता…