
न्यूज स्टेटस 24,लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश संगठन में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। प्रदेश संगठन के पुनर्गठन को लेकर राजधानी लखनऊ में लगातार मंथन जारी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार नए प्रदेश महामंत्री, उपाध्यक्ष और मंत्रियों के नामों पर गहन चर्चा की गई है, जबकि छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के नाम भी लगभग तय माने जा रहे हैं।सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक संतुलन और आगामी चुनावी रणनीति को ध्यान में रखते हुए जातीय एवं क्षेत्रीय समीकरणों पर विशेष फोकस किया जा रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर और वैश्य समाज से जुड़े नेताओं को संगठन में प्रमुख जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं अवध क्षेत्र में ब्राह्मण चेहरे को मजबूत प्रतिनिधित्व देने पर चर्चा हुई है।ब्रज क्षेत्र में शाक्य और लोध समाज के नेताओं को मौका मिलने की संभावना बताई जा रही है। इसके अलावा वाराणसी और गोरखपुर क्षेत्र के लिए भी कई नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है। पार्टी नेतृत्व सामाजिक संतुलन के साथ-साथ संगठनात्मक अनुभव और सक्रियता को भी प्राथमिकता दे रहा है।भाजपा सूत्रों के मुताबिक इस बार प्रदेश संगठन में महामंत्रियों की संख्या सात से घटाकर छह की जा सकती है। इसके पीछे संगठन को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने की रणनीति बताई जा रही है।बताया जा रहा है कि निगमों और आयोगों में भी कार्यकर्ताओं और नेताओं के समायोजन को लेकर चर्चा हुई है। करीब 25 सक्रिय भाजपा कार्यकर्ताओं और नेताओं के नाम विभिन्न जिम्मेदारियों के लिए विचाराधीन बताए जा रहे हैं।प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिलों में भी जल्द नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की तैयारी चल रही है। पार्टी नेतृत्व बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नई टीम तैयार करने में जुटा हुआ है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा संगठन में होने वाला यह बदलाव आने वाले चुनावों की रणनीति और सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।
