
अल्मोड़ा (उत्तराखंड) विवेक द्विवेदी। अल्मोड़ा जिले में कोसी नदी के तट पर स्थित उत्तराखंड के प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। शांत प्राकृतिक वातावरण, नदी का संगम और संतों की साधना से जुड़ा इतिहास इस स्थान को विशेष महत्व देता है।सबसे पहले इस स्थान की चर्चा तब व्यापक रूप से हुई जब महान संत विवेकानंद ने वर्ष 1890 के आसपास यहां पीपल के पेड़ के



1नीचे ध्यान किया। माना जाता है कि इसी स्थान पर ध्यान करते समय उन्हें “समस्त सृष्टि में एक ही आत्मा का अनुभव” हुआ था। आज भी वह पीपल का पेड़ और ध्यान स्थल श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है।काकड़ी घाट का महत्व केवल विवेकानंद के ध्यान से ही नहीं, बल्कि संत परंपरा से भी जुड़ा है। मान्यता है कि यह स्थान महान तपस्वी संत की तपोस्थली रहा है। कहा जाता है कि सोमवारी बाबा अत्यंत कठोर साधना करते थे और सामान्यतः मौन रहते थे, केवल सोमवार के दिन ही बोलते थे। इसी कारण उन्हें सोमवारी बाबा के नाम से जाना गया।धार्मिक परंपराओं के अनुसार प्रसिद्ध संत नीब करौरी बाब भी अपने गुरु सोमवारी बाबा से जुड़ी इस पवित्र भूमि पर आते रहे। बाद के समय में यहां हनुमान मंदिर और आश्रम की स्थापना कर इस स्थान को एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया।काकड़ी घाट के पास और सिरौता नदी का संगम भी बताया जाता है, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। शांत वातावरण, हरियाली और नदी की धारा के बीच स्थित यह स्थल आज भी साधना, ध्यान और पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है।हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधक और पर्यटक यहां पहुंचते हैं और संत परंपरा से जुड़ी इस पवित्र भूमि पर आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं।अब तो जो भी नीब करौरी बाबा के भक्त कैंची धाम आते हैं वह 25 किलोमीटर दूर काकड़ी घाट जरूर जाकर वहां शांत , रमणीक व पवित्र स्थान में जाकर पूजा एवं साधना करते हैं । न्यूज स्टेटस 24 – पूरी करे सच की जिज्ञासा ….. विवेक द्विवेदी, संपादक
