
📰 NEWS STATUS 24 — विवेक द्विवेदी -लखनऊ/नई दिल्ली: यूजीसी (University Grants Commission) के नियमों और हालिया संशोधनों को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच सहकार भारती उत्तर प्रदेश के महामंत्री अरविंद दुबे ने एक बयान जारी कर कांग्रेस, सवर्ण समाज और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।अरविंद दुबे ने अपने बयान में कहा कि यूजीसी के कई नियम पहले से लागू थे और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एक समिति बनाकर कुछ बदलावों की सिफारिश की गई थी। उनका दावा है कि इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस से जुड़े वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह थे, जिन्होंने संशोधन सहित रिपोर्ट सरकार को सौंपी।श्री दुबे के अनुसार, केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इन सिफारिशों को लागू किया, जिसके बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरकर विरोध शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम में सवर्ण समाज को भ्रमित करने की कोशिश की गई और सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार के खिलाफ माहौल बनाया गया।—मोदी सरकार की नीतियों का बचाव अपने बयान में श्री दुबे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार ने देश में कई बड़े फैसले लिए हैं। उन्होंने अनुच्छेद 370 का निरसन, आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई, धार्मिक स्थलों के पुनर्जीवन और भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने जैसे कदमों का उल्लेख किया।—सुप्रीम कोर्ट के नए निर्देश पर टिप्पणी । श्री दुबे ने 19 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें एक नई विशेषज्ञ समिति गठित करने की बात कही गई है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि 2012 के नियमों के तहत यूजीसी फिलहाल लागू रहेगा और कुछ प्रावधानों पर आगे विचार किया जाएगा।—राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी इस पूरे मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जहां एक ओर विपक्ष सरकार पर शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं भाजपा समर्थक इसे सुधारात्मक कदम बता रहे हैं।यूजीसी नियमों में संभावित संशोधन को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले समय में शिक्षा और राजनीति दोनों के केंद्र में बना रहेगा।—(NEWS STATUS 24 | “जो पूरी करे सच की जिज्ञासा”)
