
विवेक द्विवेदी ,कानपुर ।संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में युवा अधिवक्ता संवाद कार्यक्रम का आयोजन पंडित दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म विद्यालय में किया गया कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक रामलाल जी ने अपने उद्बोधन में राष्ट्रनिर्माण, युवा शक्ति और संगठन की कार्यप्रणाली पर विस्तृत विचार व्यक्त किए।अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उन्होंने विशेष रूप से युवा अधिवक्ताओं का आह्वान किया कि वे निरंतर अध्ययन की प्रवृत्ति विकसित करें। उन्होंने कहा कि एक सफल अधिवक्ता बनने के लिए नवीन एवं प्राचीन दोनों प्रकार के विधिक प्रकरणों का अध्ययन आवश्यक है। न्यायालय में न्यायाधीश की टिप्पणियों से विचलित हुए बिना आत्मविश्वासपूर्वक अपनी बात रखने की क्षमता ही एक श्रेष्ठ अधिवक्ता की पहचान है। नए-नए मामलों की गहन अध्ययनशीलता से न केवल दृष्टिकोण व्यापक होता है, बल्कि न्यायालय में अधिवक्ता के प्रति दृष्टि भी सकारात्मक बनती है।श्री रामलाल जी ने संघ की ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन की प्रारंभिक यात्रा अत्यंत संघर्षपूर्ण रही है। आज संघ लद्दाख से अंडमान तथा केरल से अरुणाचल तक राष्ट्रव्यापी स्तर पर कार्य कर रहा है। संघ की विशिष्ट पहचान देशभक्ति, अनुशासन और समाज सेवा है। जब-जब समाज पर संकट आया है, संघ के स्वयंसेवक पूर्ण समर्पण भाव से अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे हैं।उन्होंने कहा कि संघ अपने को बड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि भारत को सशक्त और समर्थ बनाने के लिए कार्य कर रहा है। राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करने वाले स्वयंसेवकों का उद्देश्य समाज में देशप्रेम, अनुशासन और समर्पण की भावना जागृत करना है।भारत की सांस्कृतिक चेतना पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत “सर्वे भवन्तु सुखिनः” और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की विचारधारा पर चलने वाला देश है, जो विश्व

कल्याण की कामना करता है। हिंदुत्व की जीवन दृष्टि संपूर्ण मानवता के कल्याण की भावना से ओत-प्रोत है। भारत को समझने के लिए उसकी शब्दावली, उसकी संस्कृति और उसके मूल्यों को समझना आवश्यक है।उन्होंने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व शक्तियाँ यह अनुभव कर रही हैं कि भारत तीव्र गति से प्रगति कर रहा है। अतः अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोटी-छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने का प्रयास भी किया जा रहा है। ऐसे समय में राष्ट्र की एकता और सजगता अत्यंत आवश्यक है।अपने संबोधन के अंत में श्री रामलाल जी ने “पंच परिवर्तन” का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, धर्म जागरण, स्वदेशी का पालन तथा नागरिक कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन—इन छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तनों से ही भारत सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनेगा।पूर्व न्यायाधीश सुरेश चंद्र सविता ने न्याय प्रणाली में इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों के बढ़ते उपयोग से उत्पन्न व्यावहारिक चुनौतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था पारदर्शिता और त्वरित न्याय के लिए उपयोगी अवश्य है, किंतु इसके प्रभावी क्रियान्वयन हेतु अधिवक्ताओं, विशेषकर युवा अधिवक्ताओं को समुचित प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया जाना आवश्यक है।प्रांत प्रचारक श्री राम ने सभी युवा अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि अधिवक्ता समुदाय समाज का सबसे विश्वसनीय वर्ग है समय-समय पर अधिवक्ताओं ने एकजुट होकर न्याय, संविधान की गरिमा और जान अधिकारों की रक्षा के लिए प्रभावी भूमिका निभाई है तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस दौरान कार्यक्रम में प्रांत संघचालक भवानी भीख तिवारी, सह विभाग संघचालक डॉ. विवेक सचान, प्रांत प्रचारक श्री राम, विभाग प्रचारक बैरिस्टर विभाग प्रचार प्रमुख आशीष प्रताप सिंह यति संकल्प संस्थान से समाज सेविका श्रीमती नीतू सिंह सहित सैकड़ों युवा अधिवक्ता उपस्थित रहे।
