
न्यूज स्टेटस 24 विवेक द्विवेदी,प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को पीड़ित व्यक्ति को ₹25,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए बिना पुलिस हिरासत में रखना कानून और संविधान दोनों का उल्लंघन है। मामला प्रयागराज निवासी मतांबर मिश्रा से जुड़ा है, जिन्हें वर्ष 2022 में एक घरेलू विवाद के दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में लिया गया था। आरोप है कि उन्हें बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए लगभग 24 घंटे तक थाने में रखा गया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कई बार अधिकारी यह मानकर नागरिकों के अधिकारों का हनन करते हैं कि उनके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाएगा। न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार है और राज्य की जिम्मेदारी है कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करे। अदालत ने राज्य सरकार को मुआवजा देने के साथ यह भी छूट दी कि वह संबंधित पुलिस अधिकारी से उक्त राशि की वसूली कर सकती है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब हाईकोर्ट हाल के कई मामलों में पुलिस की कार्यशैली और अधिकारों के दुरुपयोग पर सख्त टिप्पणियां कर चुका है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और पुलिस जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश है।
