
विनय निगम , ब्यूरो चीफ बुंदेलखंड, बांदा। बुंदेलखंड में बढ़ते तापमान, घटते जलस्रोतों और गहराते पर्यावरणीय संकट के बीच बांदा में युवाओं की एक नई मुहिम चर्चा का विषय बनी हुई है। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए शुरू किए गए इस अभियान ने न केवल आम लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, बल्कि अवैध खनन और पेड़ों की कटान से जुड़े तत्वों में भी बेचैनी पैदा कर दी है।बीते 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कालका चौराहे के निकट युवाओं ने मानव श्रृंखला बनाकर पेड़ों की सुरक्षा का संकल्प लिया। यह आयोजन केवल वृक्षारोपण या कुछ पेड़ों को बचाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से प्रशासन और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि बांदा की नदियों, पहाड़ों, पेड़ों और प्राकृतिक संसाधनों पर होने वाला अत्याचार अब चुपचाप नहीं सहा जाएगा।इससे पहले 31 मई को सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं ने अवस्थी पार्क में “जल, जंगल, जमीन बचाओ” जनचौपाल का आयोजन किया था। जनचौपाल में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर अवैध खनन, वृक्षों की कटान और जल संकट जैसे गंभीर मुद्दों पर चिंता व्यक्त की। युवाओं का कहना है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का दोहन इसी प्रकार जारी रहा, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन और अधिक कठिन हो जाएगा।”बांदा बचाओ” युवा मुहिम को मिल रहे जनसमर्थन के बाद प्रशासनिक तंत्र भी सक्रिय नजर आ रहा है। चर्चाएं हैं कि अवैध खनन और लकड़ी कटान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर बढ़ते जनदबाव को नजरअंदाज करना प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा।युवाओं की यह मुहिम अब एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज के अन्य वर्ग इस अभियान के साथ किस प्रकार खड़े होते हैं। फिलहाल इतना तय है कि बांदा में पर्यावरण संरक्षण की आवाज पहले से कहीं अधिक बुलंद हो चुकी है और यह आवाज अवैध खनन तथा पेड़ों की कटान के खिलाफ जनजागरण का एक नया अध्याय लिख रही है।
