
न्यूज स्टेटस 24, विवेक द्विवेदी । शायरी की दुनिया से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मशहूर शायर और पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार Bashir Badr का 91 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने भोपाल में लंबी बीमारी के बाद अंतिम सांस ली। परिवार के अनुसार, वह काफी समय से डिमेंशिया जैसी बीमारी से जूझ रहे थे। “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो,न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए…”अपने ऐसे ही यादगार शेरों और ग़ज़लों से करोड़ों दिलों में जगह बनाने वाले बशीर बद्र के इंतकाल से साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। सोशल मीडिया पर देशभर के साहित्य प्रेमी और शायर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश में जन्मे बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की और बाद में वहीं अध्यापन भी किया। उन्होंने उर्दू ग़ज़लों को आसान भाषा और आम

जिंदगी के एहसासों से जोड़कर नई पहचान दिलाई। मेरठ दंगों के दौरान उनका घर और कई अप्रकाशित रचनाएं आग में नष्ट हो गई थीं। इस हादसे के बाद वह भोपाल में बस गए, लेकिन उन्होंने लिखना और साहित्य सेवा कभी नहीं छोड़ी। उनकी शायरी में मोहब्बत, दर्द, इंसानियत और रिश्तों की गहराई साफ दिखाई देती थी। साल 1999 में उन्हें पद्मश्री और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उनके शेर आज भी मुशायरों, फिल्मों और राजनीतिक मंचों तक में सुनाई देते हैं। बशीर बद्र के निधन के साथ उर्दू अदब का एक सुनहरा अध्याय खत्म हो गया, लेकिन उनकी शायरी हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।NEWS STATUS 24पूरी करे सच की जिज्ञासा
