
हार गया बहादुरपुर, मरौली में मातम!जुर्माना नीति से जीते बालू बाज, वर्जित मशीनों से तबाह कर रहे जलजीव और जनजीवन विनय निगम ब्यूरो चीफ बुंदेलखंड,बांदा। अनियंत्रित खनन परिवहन में सबसे आगे चल रही मध्यप्रदेश की सीमावर्ती नरैनी तहसील में,जलजीवन बचाने की लड़ाई ,बहादुरपुर स्योढा भी हार गया है। ज्ञात हुआ है,ग्रामीणों की गुहार योगी सरकार के पास नहीं पहुंच पाई। रिश्वत और रसूख के बल से खनन पट्टाधारी ,कोलावल रायपुर की तर्ज पर दैत्याकार मशीनों से जलजीवन तबाह कर रहे हैं। जिससे बहादुरपुर स्योढा सहित पूरे क्षेत्र में गुस्सा और भय व्याप्त है। पट्टे की स्वीकृत सीमा से परे नदी की जलधारा अवरुद्ध करके प्रतिबंधित लिफ्टर मशीनों से बेहिसाब बालू निकाली जा रही है। सत्ताधारी खादी और मुकदमा धारी खाकी के नुमाइंदे भी अवैध खनन परिवहन के गंदे धंधे में हिस्सेदार बताएं जा रहे हैं। बालू माफिया द्वारा बहादुरपुर स्योढा में इतना खौफ भर दिया गया है, गांववासी मीडिया के सामने भी मुंह खोलने से बच रहे हैं। पता चला है, नदी में अवैध खनन का विरोध करने वाले लोगों पर झूठे मुकदमे लादे गए हैं। जलजीवों और जनजीवन पर ज़ुल्म ढाने वाले बालू बाज के खिलाफ आवाज उठाने का मतलब मुसीबत मोल लेने जैसा है।सूत्रों की मानें तो नरैनी तहसील में संचालित सभी बालू मोरंग खदानों में जुर्माना नीति के तहत बालू बाजों को स्वीकृत पट्टा सीमा से बाहर अवैध खनन कराने की ढील मिलती है। इसीलिए,अवैध खनन और परिवहन के लिए पूरे बुन्देलखण्ड में नरैनी तहसील सबसे मुफीद मानी जाती है। सूत्रों की मानें तो नरैनी तहसील में मनमाने ढंग से,रायपुरकोलावल,बिलहरका,लहुरेटा,रिसौरा और बहादुरपुर स्योढा में हो रहे अंधाधुंध खनन और परिवहन से भले ही योगी सरकार की छवि तार तार हो रही है, लेकिन, जुर्माना डील की वजह से खनिज और राजस्व विभाग के नुमाइंदे निर्धारित समय से पहले जांच करने नहीं जाएंगे। वहीं सदर तहसील के मरौली में बड़े पैमाने पर अवैध खनन होने और खेती बारी बर्बाद होने से किसान मातम मना रहे हैं।बालू बाजों से प्रताड़ित किसानों ने शासन प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई और शायद होगी भी नहीं। प्रशासन की जुर्माना पालसी यहां भी प्रभावी बताईं जा रही है।
