
News Status 24 , विवेक द्विवेदी। झांसी ।अलग बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने झांसी में प्रदर्शन करते हुए अखंड बुंदेलखंड क्षेत्र के नौ सांसदों और 56 विधायकों के सामूहिक पुतले फूंके। आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि बुंदेलखंड राज्य निर्माण के मुद्दे पर पूरी तरह मौन हैं और जनता की भावनाओं की लगातार अनदेखी कर रहे हैं।बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के अध्यक्ष भानू सहाय के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। भानू सहाय ने कहा कि वर्षों से बुंदेलखंड के लोग पृथक राज्य की मांग कर रहे हैं, लेकिन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले सांसद और विधायक इस मुद्दे को न तो विधानसभा और संसद में उठा रहे हैं और न ही केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जनप्रतिनिधि केंद्र नेतृत्व पर दबाव बनाने में असफल रहे तो आगामी चुनावों में जनता उन्हें करारा जवाब देगी।मोर्चा का कहना है कि देश में जनगणना शुरू हो चुकी है और इसके बाद होने वाले परिसीमन के माध्यम से लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि की संभावना है। ऐसे में यह सबसे उपयुक्त समय है कि केंद्र सरकार बुंदेलखंड राज्य के गठन की घोषणा करे, ताकि क्षेत्र को अलग प्रशासनिक पहचान और विकास का नया अवसर मिल सके।जिन नौ संसदीय क्षेत्रों के सांसदों और संबंधित विधायकों के प्रतीकात्मक पुतले फूंके गए, उनमें झांसी-ललितपुर, सागर, खजुराहो, टीकमगढ़, बांदा-चित्रकूट, हमीरपुर-महोबा, जालौन-गरौठा, दमोह और दतिया-भिंड शामिल हैं।बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा ने घोषणा की है कि 12 मई से दतिया-भिंड लोकसभा क्षेत्र से “जनप्रतिनिधि धिक्कार यात्रा” की शुरुआत की जाएगी। यह यात्रा नौ संसदीय क्षेत्रों से होकर गुजरेगी। इसके तहत खून से पत्र लिखना, मशाल जुलूस निकालना, एक हजार बुंदेली योद्धाओं को शपथ दिलाना और गांव-गांव चौपाल आयोजित कर जनता को आंदोलन से जोड़ने का काम किया जाएगा।प्रदर्शन में अशोक सक्सैना, रघुराज

शर्मा, हनीफ खान, उत्कर्ष साहू, प्रदीप जैन, रामजी सिंह पारीछा, अनिल कश्यप, गोलू ठाकुर, बृजेश राय, दुलीचंद, प्रेम सपेरा, अभिषेक तिवारी, राजेश लोहिया, प्रभूदयाल कुशवाहा, रशीद कुरैशी, अजय श्रीवास्तव, जब्बार खान, शाहजहां बेगम, साईदा बेगम, कुन्ती राय, शबनम आरा खान और गीता देवी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।बुंदेलखंड लंबे समय से सूखा, पलायन, बेरोजगारी और विकास की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। अलग राज्य की मांग करने वाले संगठनों का मानना है कि पृथक राज्य बनने से क्षेत्र को बेहतर प्रशासन, विशेष योजनाएं और तेज विकास का लाभ मिलेगा। अब आंदोलन के इस नए चरण के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं।
