कानपुर से विवेक द्विवेदी की रिपोर्ट 🎵 I भारतीय शास्त्रीय संगीत की ताकत को लेकर आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों ने अहम शोध सामने रखा है। संस्थान में किए गए अध्ययन में पाया गया है कि राग मिश्र जोगिया उदासी और तनाव की स्थिति में भी मस्तिष्क को संतुलित रखने में मदद करता है।यह शोध आईआईटी कानपुर के उप निदेशक प्रो. वज्रभूषण के नेतृत्व में किया गया, जिसे स्विट्जरलैंड की प्रतिष्ठित पत्रिका Frontiers in Neuroscience में प्रकाशित किया गया है।🧠 मस्तिष्क की


गतिविधियों में दिखा सकारात्मक बदलाव शोध के दौरान प्रतिभागियों पर ईईजी (Electroencephalogram) और माइक्रोस्टेट एनालिसिस तकनीक का इस्तेमाल किया गया। पहले उन्हें उदासी की स्थिति में लाया गया, फिर राग मिश्र जोगिया सुनाया गया।परिणामों में सामने आया कि—ब्रेन वेव्स में सकारात्मक परिवर्तन दर्ज हुआ ।तनाव और दुख की भावना में कमी आई भावनात्मक संतुलन बेहतर हुआ एकाग्रता और ध्यान क्षमता में सुधार देखा गया मानसिक स्थिरता का स्तर बढ़ा वैज्ञानिकों के मुताबिक, राग मिश्र जोगिया सुनने से दिमाग के उन हिस्सों में सक्रियता बढ़ती है, जो भावनाओं के नियंत्रण और ध्यान से जुड़े होते हैं।🔬 माइक्रोस्टेट विश्लेषण से मिली पुष्टि ।माइक्रोस्टेट एनालिसिस में यह स्पष्ट हुआ कि संगीत सुनने के बाद

मस्तिष्क की कार्यप्रणाली ज्यादा संगठित और स्थिर हो गई। इससे यह संकेत मिलता है कि शास्त्रीय संगीत मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।👨🔬 प्रो. वज्रभूषण ने बताया,“यह अध्ययन दर्शाता है कि भारतीय शास्त्रीय संगीत केवल सांस्कृतिक विरासत नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी प्रभावी साधन हो सकता है। आने वाले समय में म्यूजिक थैरेपी के क्षेत्र में इसके व्यापक उपयोग की संभावनाएं हैं।”🌿 मानसिक स्वास्थ्य के लिए नई उम्मीद है ।विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध डिप्रेशन, एंग्जायटी और तनाव जैसी समस्याओं के इलाज में म्यूजिक थैरेपी को मजबूत वैज्ञानिक आधार देता है।आईआईटी कानपुर का यह अध्ययन भारतीय संगीत की वैज्ञानिक शक्ति को वैश्विक मंच पर स्थापित करता है और मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में नई उम्मीद जगाता है।
