बजट वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया है कि क्या विकास सिर्फ परियोजनाओं से मापा जाएगा या आम आदमी की जेब से भी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट में पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल) के लिए

बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में संभावनाओं के द्वार तो खोले गए हैं, लेकिन आयकर राहत के मोर्चे पर सरकार की चुप्पी ने मध्यम वर्ग को निराश किया है।पूर्वांचल लंबे समय से पिछड़ेपन, बेरोजगारी और पलायन की समस्या से जूझता रहा है। ऐसे में हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, फ्रेट कॉरिडोर और लॉजिस्टिक हब जैसी घोषणाएं इस क्षेत्र के लिए उम्मीद की किरण बनकर उभरी हैं। लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और मिर्जापुर जैसे शहरों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से उद्योग, व्यापार और निवेश को गति मिल सकती है। यदि ये योजनाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू होती हैं, तो पूर्वांचल देश की आर्थिक मुख्यधारा से जुड़ सकता है।शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में हर जिले में बालिका छात्रावास और विश्वविद्यालय टाउनशिप का प्रस्ताव स्वागत योग्य है। यह कदम न केवल महिला शिक्षा को बढ़ावा देगा, बल्कि पूर्वांचल में कौशल विकास और तकनीकी दक्षता को भी मजबूती देगा। लंबे समय से यह क्षेत्र उच्च शिक्षा के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहा है, जिसे यह बजट आंशिक रूप से बदल सकता है।स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर बीमारियों की दवाओं पर शुल्क में छूट और बायोफार्मा शक्ति कार्यक्रम के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया कदम है। इससे पूर्वांचल में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ फार्मा उद्योग और शोध गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बनती हैं।हालांकि, विकास के इन दावों के बीच मध्यम वर्ग की सबसे बड़ी उम्मीद—आयकर राहत—पूरी नहीं हो सकी। बढ़ती महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य पर बढ़ता खर्च तथा स्थिर आय के बीच कर राहत न मिलना आम करदाता के लिए बड़ा झटका है। यही कारण है कि बजट के बाद शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, जो निवेशकों के भरोसे में आई कमी को दर्शाती है।राजकोषीय घाटा 4.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का दावा और बढ़ती सरकारी उधारी यह संकेत देती है कि सरकार अभी भी वित्तीय संतुलन और विकास के बीच संतुलन साधने की कोशिश में है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह संतुलन आम नागरिक की भागीदारी के बिना संभव है?कुल मिलाकर, बजट 2026 पूर्वांचल के लिए दीर्घकालिक विकास का खाका तो पेश करता है, लेकिन तात्कालिक राहत के अभाव में मध्यम वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है। सरकार को यह समझना होगा कि मजबूत बुनियादी ढांचा तभी सार्थक होगा, जब उसे मजबूत उपभोक्ता और संतुष्ट करदाता का साथ मिले।विकास के वादों के साथ भरोसे की भी जरूरत है—और यही इस बजट की सबसे बड़ी कमी है।
