
न्यूज स्टेटस 24 की खास रिपोर्ट ✍🏼 विवेक द्विवेदी। 2 जून 1995 को लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित राज्य अतिथि गृह (स्टेट गेस्ट हाउस) में उत्तर प्रदेश की राजनीति की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक हुई, जिसे बाद में “गेस्ट हाउस कांड” कहा गया। उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार थी। बसपा ने सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया था और मायावती अपने विधायकों के साथ गेस्ट हाउस में बैठक कर रही थीं। घटना के दौरान बड़ी संख्या में सपा समर्थकों और नेताओं के गेस्ट हाउस पहुंचने, हंगामा करने और बसपा विधायकों के साथ मारपीट करने के आरोप लगे। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि मायावती को खुद को एक कमरे में बंद करना पड़ा। उनके अनुसार उन पर हमला करने और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई। बाद में पुलिस और अन्य राजनीतिक नेताओं के हस्तक्षेप से स्थिति नियंत्रित हुई। उस घटना के बाद सपा और बसपा के संबंध पूरी तरह टूट गए। इसके बाद भाजपा के समर्थन से मायावती पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। यह घटना उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ मानी जाती है क्योंकि इसके बाद सपा और बसपा के बीच लंबे समय तक गहरी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बनी रही। न्यूज फैक्ट : 2 जून 1995,स्थान: मीराबाई मार्ग स्टेट गेस्ट हाउस, लखनऊ ,मुख्य पक्ष: सपा और बसपा मुख्य नेता: मायावती और मुलायम सिंह यादव परिणाम: सपा-बसपा गठबंधन का अंत और भाजपा समर्थन से मायावती की सरकार का गठन।
भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी का नाम 2 जून 1995 के गेस्ट हाउस कांड में इसलिए प्रमुखता से लिया जाता है क्योंकि अनेक समाचार रिपोर्टों और राजनीतिक विवरणों के अनुसार उन्होंने उस समय मायावती की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जब गेस्ट हाउस में तनावपूर्ण स्थिति बनी और मायावती अपने कमरे में थीं, तब ब्रह्मदत्त द्विवेदी वहां पहुंचे और उन्हें सुरक्षित निकालने तथा भीड़ से बचाने में मदद की। कई रिपोर्टों के अनुसार द्विवेदी स्वयं भी उसी गेस्ट हाउस में ठहरे हुए थे। घटना की जानकारी मिलने पर वे मायावती के कमरे तक पहुंचे, उनके आसपास सुरक्षा घेरा बनाया और हालात सामान्य होने तक उनके साथ रहे। कुछ विवरणों में यह भी उल्लेख है कि उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साधा और बाद की राजनीतिक घटनाओं में भूमिका निभाई। इस घटना के बाद मायावती और ब्रह्मदत्त द्विवेदी के बीच व्यक्तिगत सम्मान का संबंध स्थापित हुआ। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद मायावती सार्वजनिक रूप से उन्हें अपना “भाई” कहती थीं। 1997 में उनकी हत्या के बाद मायावती उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने पहुंचीं और उनकी पत्नी के चुनाव में समर्थन भी किया था। हालांकि गेस्ट हाउस कांड के कई पहलुओं पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं के अपने-अपने दावे रहे हैं, लेकिन यह तथ्य व्यापक रूप से दर्ज है कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने उस संकट के दौरान मायावती की सुरक्षा में हस्तक्षेप किया था और इसी कारण उनका नाम इस घटना के साथ स्थायी रूप से जुड़ गया। News Status 24 पूरी करे सच की जिज्ञासा।
