
NEWS STATUS 24 विवेक द्विवेदी ✍🏼 कोलकाता । पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर असंतोष चरम पर पहुंच चुका है और बड़ी संख्या में विधायक पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पार्टी के लगभग दो-तिहाई विधायक बागी खेमे के संपर्क में हैं और संगठन में बड़ी टूट की आशंका जताई जा रही है। हाल के दिनों में टीएमसी ने अपने दो विधायकों—रितब्रत बनर्जी और संदीपन साहा—को “पार्टी विरोधी गतिविधियों” के आरोप में निष्कासित कर दिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पार्टी के भीतर नेतृत्व और विपक्ष के नेता के चयन को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, विपक्ष के नेता के चयन को लेकर टीएमसी विधायकों का एक वर्ग पार्टी नेतृत्व से असहमत है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि बड़ी संख्या में विधायक पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रुख अपनाने की तैयारी में हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस बीच ममता बनर्जी ने बागी नेताओं को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के दम पर चलती है और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ऐसे नेताओं के बिना बेहतर स्थिति में है जो संगठन के खिलाफ काम करते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद टीएमसी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कई नेता पार्टी की भविष्य की रणनीति और संगठनात्मक ढांचे पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं। बड़ा सवालयदि वास्तव में दो-तिहाई विधायक अलग खेमे में जाते हैं तो क्या पश्चिम बंगाल की राजनीति में महाराष्ट्र की शिवसेना जैसी स्थिति बन सकती है? फिलहाल यह केवल राजनीतिक अटकलों और सूत्रों पर आधारित चर्चा है, लेकिन टीएमसी के भीतर बढ़ती खींचतान ने ममता बनर्जी की चुनौतियां जरूर बढ़ा दी हैं। NEWS STATUS 24 इस घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है।
