
विवेक द्विवेदी। न्यूज स्टेटस 24/कानपुर। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मनमानी और दलालों के नेटवर्क पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार सुबह कानपुर के उर्सला अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया, जब जितेंद्र प्रताप सिंह भारी पुलिस बल और प्रशासनिक टीम के साथ औचक निरीक्षण के लिए पहुंच गए।सुबह करीब

9:30 बजे जिलाधिकारी और एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार ने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया। जांच के दौरान अस्पताल की कार्यप्रणाली की गंभीर खामियां उजागर हुईं।सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ड्यूटी समय के बावजूद 22 डॉक्टर और 10 अन्य कर्मचारी, यानी कुल 32 कर्मचारी, अपनी सीटों से अनुपस्थित मिले। जिलाधिकारी ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए सभी अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए।निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि संस्थान के निदेशक डॉ. बी.सी. पॉल स्वयं डीएम के पहुंचने के लगभग आधे घंटे बाद अस्पताल पहुंचे।ओपीडी में तैनात सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा के हस्ताक्षर उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज पाए गए, लेकिन वे अपने कक्ष में मौजूद नहीं थे। जिलाधिकारी ने इसे संभावित धोखाधड़ी मानते हुए हस्ताक्षरों की विस्तृत जांच के आदेश दिए।निरीक्षण के दौरान अस्पताल में सक्रिय दलालों के नेटवर्क पर भी कार्रवाई की गई। मौके से दो संदिग्ध दलालों, विवेक तिवारी और हैदर अली को गिरफ्तार किया गया। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है कि उनके संपर्क अस्पताल के किन कर्मचारियों से जुड़े हैं।जिलाधिकारी ने सीएमएस को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी गरीब मरीज को बाहर की दवा न लिखी जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कमीशनखोरी के उद्देश्य से मरीजों को बाहर की दवा या जांच के लिए भेजे जाने की शिकायत मिली, तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में लापरवाही और भ्रष्टाचार किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और संदिग्ध व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए।इस कार्रवाई के बाद शहर के अन्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में भी खलबली मच गई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी इसी प्रकार के औचक निरीक्षण किए जा सकते हैं।
